Thursday, September 1, 2011

हाइकु




प्रिय मित्रो
गीतों पर आपकी प्रतिक्रियायों के लिए आभार… इस बार कुछ हाइकु कवितायेँ सांझा कर रहा हूँ… अपनी मूल्यवान टिप्पणियाँ अवश्य भेजिएगा…प्रतीक्षा रहेगी…
लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

१.
उठाये प्रश्न !
फिर खोजे उत्तर
हुए अमर ...

२.
कैसे बदले
सड़ी गली व्यवस्था
सब बेचैन ..

३.
सब से खुश
वो जो नहीं जानता
सुविधाओं को

४.
पूछा स्वयं से
कौन हूँ मैं क्या हूँ मैं !
उत्तर शून्य


५.
एक कंकरी
अनगिन लहरें
शांत झील में

६.
धारा को बांधा
नदी का तीव्र क्रोध
बना बिजली ..

७.
की बगावत
नीव के पत्थरों ने
ढहे महल

८.
डर ही डर
घर हो या बाहर
जाएँ तो कहाँ

९.
परिचित हूँ
जीवन के अंत से
किन्तु जियूँगा

१०.
क्या पा लिया था
ये तब जाना जब
उसे खो दिया ...

११.
चुने भेड़ों ने
समारोह पूर्वक
स्वयं शिकारी…

18 comments:

Dr Varsha Singh said...

सभी हाइकु बेहद उत्कृष्ट हैं. आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

mridula pradhan said...

wah.....kya achcha likhe hain.

ZEAL said...

All are so good.

गरिमा said...

bahut sundar
lag rahe haiku
manbhawan

hai shanti chaai
ruk gaya samay
hue shabd maun

चण्डीदत्त शुक्ल said...

संक्षिप्त
सटीक
सुंदर
सरस!
शुभकामनाएं...

ashok andrey said...

aapki haekoo man ko chhu gaey har haekoo bahut gehre artho se pagee huee hai-
kee bagavat
neevn ke pathron ne
dhaemahal.
kitnee sateek baat kahee hai,badhai.

Divik Ramesh said...

बहुत खूब । बधाई ।

Jitendra Dave said...

दिल को छू ले
ये हाइकू आपके
हुए हमारे

डॉ. जेन्नी शबनम said...

sabhi haaiku bahut badhiya. jiska jawaab koi na de sake waisa hin prashn hai ye...
पूछा स्वयं से
कौन हूँ मैं क्या हूँ मैं !
उत्तर शून्य
shubhkaamnaayen.

मीनाक्षी said...

खूबसूरत
भावपूर्ण हैं सभी
हाइकु सारे

ranjan zaidi said...

Insan ki nafsiyati kaifiyat ko hyku ke roop mayn jis mala ko pirokar use pesh kiya hai,uske moti bikharne na payen, Is liye dhaga mazboot rackkhen.Hardik Khubhkamnayen.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सभी बहुत बढ़िया लिखे हैं ...बेहतरीन

रचना दीक्षित said...

आपके सभी हाइकू एक से बढ़कर एक लगे
बधाई

geetashree said...

बहुत सुंदर और सारगर्भित हैं हाइकू। आपने साध लिया है इस विधा को। आसान नहीं है..पर आपने कर दिखाया। एक एक लाइन..जैसे बड़े बड़े अर्थो को खोलने वाली खिड़की..चुने भेड़ो ने..वाली लाइन तो कमाल है। जितनी बार पढती हूं..उतनी बार कई कई अर्थ खुलते हैं। और लिखें..बधाई।

गीताश्री

Kishore Kumar Jain said...

हमें भी बहुत पसंद आई आपकी हाइकु कविताँए. धन्यवाद.
किशोर कुमार जैन
गुवाहाटी असम

अरुण चन्द्र रॉय said...

सभी हाइकु प्रभावशाली. छोटे किन्तु असर देर तक बना रहता है.

शशिकांत गीते said...

सभी हाइकु बहुत अच्छे हैं. बधाई.

sunita agarwal said...

umda