
॥एक॥
हम तो अभिशापों से वरदान जुटा लेते हैं
ग़म से भी ख़ुशियों के सामान जुटा लेते हैं
वे जो मनहूस हैं, रो-रो के वो जीते होंगे
हम तो आँसू से भी मुस्कान जुटा लेते हैं
॥दो॥
न कोई बोल जब पाए तो कविता बोल देती है
अँधेरों में, ये खिड़की रौशनी की, खोल देती है
ये ताकत भी है कविता में, अगर सचमुच वो कविता है
वो मरते आदमी में ज़िन्दगी-सी घोल देती है
॥तीन॥
वक़्त आएगा तो कांटों से चुभन मांगेंगे
वक़्त आएगा तो शोलों से तपन मांगेंगे
तुमको देखे तो कोई आँख उठाकर ऐ वतन
हम तो हँसते हुए मरघट से क़फ़न मांगेंगे
॥चार॥
कभी तो अपने सवालों का जवाब आएगा
कभी तो अपने भी गुलशन पे शबाब आएगा
बढ़ती जाती है घुटन जितनी भी बढ़ जाने दो
इसी घुटन से नया इन्क़लाब आएगा
॥पाँच॥
ये घड़ी वक़्त की बस चलती चली जाती है
औ’ इरादों की घड़ी टलती चली जाती है
इक तरफ़ बोझ है अरमानों का सर पे अनगिन
और ये उम्र… कि बस ढलती चली जाती है
॥छह॥
पंख फैलाएंगे परवाज़ करेंगे हम लोग
इक नया जीने का अंदाज़ करेंगे हम लोग
जो ग़लत होता रहा, धूल गिरा के उस पर
इक नये दौर का आग़ाज़ करेंगे हम लोग
॥सात॥
दर्द ख़ुद झेल के ख़ुशियों की फ़सल देते हैं
जिनमें खतरे हों, उन्हीं राहों पे चल देते हैं
जिनकी सोचों में है, औरों की भलाई हर पल
ऐसे कुछ लोग ही, दुनिया को बदल देते हैं
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29 comments:
हर एक मुक्तक एक से बढ़ कर एक है किसी एक की तारीफ करना मुमकिन नहीं बस ये दुनिया बदलने का इक सपना साकार हो जाये और क्या चाहिए
वाजपेयी जी.. आपको अक्सर दूरदर्शन पर देखता हूँ.. आपकी कवितायें भी सुनता रहा हूँ... आपके इन मुक्तकों से जहाँ मैं प्रेरित हो रहा हूँ वहीँ आपके लेखन का नया आयाम दिख रहा है... जहाँ चारो ओर निराशा ही निराशा है.. आपके मुक्तक प्रेरणा का भाव भर रहे हैं.. सातो मुक्तक अलग अलग मिजाज का होते हुए भी एक स्वर में हैं... मुक्तकों में सपाटबयानी से बचते हुए आप बिम्ब के माध्यम से कह रहे हैं.. अच्छा लगा... सादर !
कभी तो अपने सवालों का जवाब आएगा
कभी तो अपने भी गुलशन पे शबाब आएगा
बढ़ती जाती है घुटन जितनी भी बढ़ जाने दो
इसी घुटन से नया इन्क़लाब आएगा
बहुत सुंदर
यहां भी आइए
http://veenakesur.blogspot.com/
विदेश भ्रमण की बधाई .....
फोन किया तो पता चला आप विदेश यात्रा पर हैं .....
और ये मुक्तक......
वक़्त आएगा तो कांटों से चुभन मांगेंगे
वक़्त आएगा तो शोलों से तपन मांगेंगे
तुमको देखे तो कोई आँख उठाकर ऐ वतन
हम तो हँसते हुए मरघट से क़फ़न मांगेंगे
सुभानाल्लाह ......
वतन के लिए अनमोल शब्द .....!!
बहुत सी सुन्दर पन्तियाँ .......
वक़्त आएगा तो कांटों से चुभन मांगेंगे
वक़्त आएगा तो शोलों से तपन मांगेंगे
तुमको देखे तो कोई आँख उठाकर ऐ वतन
हम तो हँसते हुए मरघट से क़फ़न मांगेंगे
ये मुक्तक तो दिल को छु गया ....
आदर सहित
मंजुला
क्या बात है!
तारीफों के पुल हम से नहीं बढ़ेंगे
हम अहसासों से बह जाते हैं चलो!
शुभकामनाएं.
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कुछ ग़मों की दीये
बहुत सही और नहुत सही अंदाज़ में कहा है दोस्त... एक नए दौर का आगाज़ वही कर सकता है जो अभिशापों से वरदान जुटा सके और हंस कर मरघट से कफ़न मान्गेने का हौसला रखे. इन मुक्तकों के लिए कोटिशः बधाई
अशोक गुप्ता
मोबाइल 9871187875
प्राणों में उर्जा और उत्साह भरते सभी के सभी मुक्तक बेजोड़ हैं...
मन हरिया गया पढ़कर...
बहुत बहुत आभार !!!
कुछ मुक्तक तो सुने हुए थे.
इक नये दौर का आग़ाज़ करेंगे हम लोग.....
ज़रूर
--
प्रो. अशोक चक्रधर
उपाध्यक्ष
केन्द्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल, आगरा
(मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार)
उपाध्यक्ष
हिन्दी अकादमी, दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार)
लक्ष्मीशंकर जी,
मुक्तक पसंद आए। बधाई। कभी अनुभूति (http://www.anubhuti-hindi.org ) के लिये भी मुक्तक भेजें तो बड़ी कृपा होगी।
अनेक शुभकामनाओं सहित,
पूर्णिमा वर्मन
सभी मुक्तक प्रशंशनीय!
सुन्दर प्रस्तुति!
सभी म्य्क्तक बहुत सुन्दर हैं। बधाई।
बढ़िया प्रस्तुति।
एक से बढ़ कर एक है हर एक मुक्तक....
सुन्दर प्रस्तुति!
अादरणीय वाजपेयी जी, अापके ब्लाग पर रचनाअो का रसास्वादन कर खुश हुं.
दर्द ख़ुद झेल के ख़ुशियों की फ़सल देते हैं
जिनमें खतरे हों, उन्हीं राहों पे चल देते हैं
जिनकी सोचों में है, औरों की भलाई हर पल
ऐसे कुछ लोग ही, दुनिया को बदल देते हैं........... प्रेरणादायी मुक्तक.
साल के शुरुवात मे २ ३ जनवरी के समारोह मे अापसे मिले पल को सहेज रखा है मैने.
"कितना बेगाना उसे अपना घर लगता है... " अापके ये नज्म मै दोहराता रहता हुं
एक लिंक
http://sulabhpatra.blogspot.com/2010/01/ek-report.html
ब्लाग पर अब अाता रहुंगा.
kafi achhi kavita lagi. jiwan ko bastutah aise hi positive rang ke sath dekhna chahiye. aabhar
इक नये दौर का आग़ाज़ करने में समर्थ इन मुक्तकों का स्वागत है।
bhai vajpayee ji,aapke ye muktak sangharsh se safalata ki prerana dete hain aur ek sambal pradan karte hain.....sadhuvad.
yati
bahut khoob.........
वाजपेई जी ,आप के कुछ मुक्तक तो कई वार सुने हैं .आज यहाँ एक साथ पाकर इनकी रचनात्मक उर्जा का गहराई से अहसास हुआ .इन सशक्त मुक्तकों के लिए आप को हार्दिक बधाई .
धन्यवाद बाजपेई जी इन मुक्तकों पढ़वाने के लिए.
चन्देल
सकारात्मक भाव लिए आपके सभी मुक्तक अनूठे और प्रेरक हैं...मेरी बधाई स्वीकार करें...
नीरज
सम्मानिय सर
सादर प्रणाम!
आप के मुक्तक नयी बाते करते है , आशावादी भाव लिए , बहुत बहुत बधाई !
सादर
मुक्त करते हुए मुक्तक|संतुष्ट करते हुए|प्रेरक|ताजा हवा के झोंके सा आह्लादित करते हुए|संवेदनशील कवि-हृदय की उत्कृष्ट अभिव्यक्तियाँ|कवि और कविता दोनों बोल रहे हैं|बधाई|
- अरुण मिश्र.
Jo bhi kehte ho khoob kehte ho, kuchh na kuchh apne saath beeta huaa yaad aata hai....Darshan Darvesh
har muktak jaise apne aap men paripurn hai.padhkar bahut achcha laga.
bahut badiya uncle......
khaas taur se
"वक़्त आएगा तो कांटों से चुभन मांगेंगे
वक़्त आएगा तो शोलों से तपन मांगेंगे
तुमको देखे तो कोई आँख उठाकर ऐ वतन
हम तो हँसते हुए मरघट से क़फ़न मांगेंगे"
bahut hi achha hai...
bahoot dino ke bad aaj aachi rachanayen padhane ko mileen.badhai sweekaren.Rama singh
बहुत अच्छा लिखा है लिखते रहो और समाज में जोश भरते रहो
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